देवगुरु बृहस्पति के मंत्र (Guruwar Mantras) ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:। ॐ ऐं श्रीं बृहस्पतये नम:। ॐ गुं गुरवे नम:। ॐ बृं बृहस्पतये नम:। ॐ क्लीं बृहस्पतये नम:। ॐ क्लीं बृहस्पतये नम:। Planet Jupiter in our solar system represents Lord Brihaspati who is the Priest(Guru) of Gods, hence […]
Yearly Archives: 2018
Goddess Durga is the deity of all tantra and mantra. Lakshmi is the goddess of wealth, fortune, power, luxury, beauty, fertility, and auspiciousness. मोक्ष प्राप्त करने हेतु मंत्र- ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’। व्यय वृद्धि रोकने हेतु मंत्र- ‘ॐ श्रीं नम:’। भय निवारण हेतु मंत्र- ‘दुर्गे-दुर्गे रक्षिणि स्वाहा’। स्मरण […]
श्री शिव चालीसा दोहाश्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान । कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान ॥ जय गिरिजा पति दीन दयाला । सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥ भाल चन्द्रमा सोहत नीके । कानन कुण्डल नागफनी के॥ अंग गौर शिर गंग बहाये । मुण्डमाल तन छार लगाये ॥ वस्त्र […]
शिव स्तुति कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम् । सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि ॥ अर्थ यह जो कपूर की तरह निर्मल एवम श्वेत हैं और करुणा एवम दया का रूप हैं सारा संसार इनमे ही निहित हैं जिसने सर्प को हार की तरह धारण किया हैं जो संसार के प्रत्येक कोने […]
मोहिनी एकादशी वैशाख शुक्ल की एकादशी को मोहिनी एकादशी के रूप में जाना जाता है। मान्यता अनुसार इस एकादशी के व्रत से व्रती मोह-माया से ऊपर उठ जाता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। जब समुद्र मंथन हुआ तो अमृत प्राप्ति के बाद देवताओं व असुरों में आपाधापी मच […]
।। शिव अष्टकम ।। प्रभुं प्राणनाथं विभुं विश्वनाथं जगन्नाथनाथं सदानन्दभाजम । भवद्भव्यभूतेश्वरं भूतनाथं शिवं शङ्करं शंभुमीशानमीडे ॥१॥ गले रुण्डमालं तनौ सर्पजालं महाकालकालं गणेशाधिपालम । जटाजूटगङ्गोत्तरङ्गैर्विशालं शिवं शङ्करं शंभुमीशानमीडे ॥२॥ मुदामाकरं मण्डनं मण्डयन्तं महामण्डलं भस्मभूषाधरं तम । अनादिं ह्यपारं महामोहमारं शिवं शङ्करं शंभुमीशानमीडे ॥३॥ तटाधोनिवासं महाट्टाट्टहासं महापापनाशं सदा सुप्रकाशम । गिरीशं […]
ॐ श्री सरस्वतयै नमः।। या कुन्देन्दु तुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना ।। या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता। सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ।।1।। शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमांद्यां जगद्व्यापनीं । वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यांधकारपहाम्।। हस्ते स्फाटिक मालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम् । वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्।।2।।
नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते । शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ श्रीपीठपर स्थित और देवताओं से पूजित होने वाली हे महामाये। तुम्हें नमस्कार है। हाथ में शंख, चक्र और गदा धारण करने वाली हे महालक्ष्मी ! तुम्हें प्रणाम है । सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि । मन्त्रपूते सदा देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते […]
वक्र तुंड महाकाय, सूर्य कोटि समप्रभ:। निर्विघ्नं कुरु मे देव शुभ कार्येषु सर्वदा ॥ हे हाथी के जैसे विशालकाय जिसका तेज सूर्य की सहस्त्र किरणों के समान हैं । बिना विघ्न के मेरा कार्य पूर्ण हो और सदा ही मेरे लिए शुभ हो ऐसी कामना करते है । गजाननं भूतगणादिसेवितं […]